हमें, यह मैकाले की नहीं, विश्वगुरु की शिक्षा चाहिए।
आओ, जड़ों से जुड़ें, मिलकर भविष्य उज्जवल बनायें।।- तिलक
सुशिक्षा, शिक्षा,साक्षरता में अंतर- आकर्षक ब्लॉग। ग्रह, उपग्रह, और ब्रह्माण्ड विज्ञान के बारे में। तक्षशिला और नालंदा विश्व विद्यालयों को अग्नि की भेंट कर वो कहते हैं तुम अज्ञानी हो। पश्चिम की शिक्षा को ही कल्याण का मार्ग समझाया जाता है। सत्य हम जानते हैं। हमें यह नहीं, विश्व गुरु की शिक्षा चाहिए। - तिलक संपादक युगदर्पण. Media Samooh YDMS👑 9971065525, 9540007991, 9910260268, 9999777358
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1. वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस का परोसा जाना,
8. आर्य समाज ने हिन्दुओं, मुसलमानों, पारसियों, सिखों और ईसाइयों के बीच पनप रही, राष्ट्रीय एकता को भंग करने का प्रयास किया। (कक्षा 12-आधुनिक भारत, पृष्ठ 183, लेखक-विपिन चन्द्र)
युदस रायपुर :विश्व हिंदू परिषद के दबाव में कैथलिक मिशनरीज अंततः को झुकना ही पड़ा। बस्तर क्षेत्र के कैथलिक मिशनरीज विहिप के दबाव में अपने स्कूलों के प्रिंसिपल को फादर के बदले, अब प्राचार्य और उपप्राचार्य कहेंगे। विहिप ने कहा था कि मिशनरीज स्कूलों में जिन्हें फादर कहा जाता है उन्हें प्रायार्य, उपप्राचार्य या सर कहा जाए।यह पढ़ाया जाता रहा है आपके बच्चों को.....!!!! 1. वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस का परोसा जाना, सम्मान सूचक माना जाता...
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